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ہم کچھ نہیں ہیں ۔۔۔ امام حسین کے دروازے کی قیدی عابدہ پروین۔۔۔

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صوفیانہ  موسیقی  کی  ملکہ  اور  اپنی  آواز  کے  سوز  سے  روح  تک  اتر  جانے  والی  عابدہ  پروین  کی  عاجزی  اور  انکساری  نے  انکے  مداحوں  کے  دل  میں  انکا  مقام  مزید  بڑھا  دیا  ہے۔

حرا  خالد

میں  نعرہ  مستانہ  اور  میں  جانوں  میرا خدا  جانے  جیسے  روح  انگیز  صوفیانہ  کلام  کی  گائیک  عابدہ  پروین  صرف  پاکستان  میں  نہیں  بلکہ  دنیا  بھر  میں  اپنی  آواز  و  انداز  کے  باعث  پہچانی  جاتی  ہیں  اور  انکے  مداح  سات  سمندر  پار  بھی  انکے  کلام  کے  باعث  خود  کو ایک  الگ  دنیا  میں  محسوس  کرتے  ہیں  ،  وہ  دنیا  جہاں  روح  تک  رسائی  ہوتی  ہے  اور  دل  و  نگاہ  عشق  کی  معراج  طے  کرتے  ہیں۔

کوک  اسٹوڈیو  سیزن  14 کا  آغاز  عابدہ  پروین  اور  نصیبو  لعل  کے  صوفیانہ  کلام  تو  جھوم  سے  ہوا  ہے  جسے  سامعین  نے  بہت  پسند  کیا  ہے۔  اس  کلام  کی  ریکارڈنگ  سے  قبل  عابدہ  پروین  اور  نصیبو  لعل  کی  ایک  دوسرے  سے  ملاقات  اور  اجازت  کی  ویڈیو  بھی  بہت  مقبول  ہوئی  تھی  جس  میں  دونوں  گلوکاراؤں  کو  ایک  دوسرے  سے  انتہائی  عجز  سے  ملتے  دکھایا  گیا  تھا۔

اس  وائرل  ویڈیو  سے  متعلق  ایک  انٹرویو  میں  عابدہ  پروین  سے  اس انکسارانہ رویے  پر  سوال  کیا  گیا تو  وہ  جواب  دیتے  ہوئے  زار  وقطار  رونے  لگیں۔

انٹرویو  کے  دوران جب ان  سے  سوال  کیا  گیا  کہ  تو  جھوم  کی  ریکارڈنگ  کے  وقت  جب  آپ  سیٹ  پر  تشریف  لائیں  اور  نصیبو  جی  سے  ملیں  ،  اور  آپ  دونوں  نے  انتہائی  انکساری  سے  ایک  دوسرے  سے  اجازت  مانگی ۔۔۔  آپ  اتنی  خدا  کے  قریب  ہیں  اور  خود  اتنی  بڑی  ہستی  ہیں  آپ  میں  یہ  عاجزی  انکساری  کہاں  سے  آئی؟

اس  سوال  کے  جواب  میں  عابدہ پروین  جذبات  پر  قابو  نہ  رکھ  سکیں  اور  زاروقطار  رونے  لگیں۔  صوفی  گلوکارہ  عابدہ  پروین  کا  کہنا  تھا  کہ  یہ  عاجزی  بھی  تو  اس  دروازے  کا  تحفہ  ہے  ،  اس  دروازے  کی  دین  ہے۔

یہ  ادب  ،  نگاہ  اور  راز  کا  ظہور  تو  اس  در  کا  تحفہ  ہے  ،  ہم  میں  تو  کچھ  نہیں  ہے،  جو  ہیں  وہی  ہیں۔

عابدہ  پروین  نے  بتایا  کہ  مجھے  بچپن  میں  میری  ماں  نے  امام  حسین  کے  دروازے  کا  قیدی  بنایا  تھا  ،  بچپن  میں  ہی انکے  در  کی  زنجیر سے  بندھ  گئی  تھی، ہم شہنشاہوں  کے  قیدی  ہیں۔  یہ  کہنے  کے  بعد  عابدہ  پروین  مزید  بات  نہیں  کر  سکیں  اور  زار  و  قطار  روتی  رہیں۔

عابدہ  پروین  اس  سے  قبل  بھی  اکثر  اوقات  اسی  عاجزی  اور  انکساری  کا  مظاہرہ  کرتی  ہیں  اور  یہی  انکا  بڑا  پن  ہے  اور  انکے  یہی  انداز  و  اطوار  انکے  مداحوں  کے  دل  میں  انکی  محبت  و  عزت  مزید  بڑھا  دیتے  ہیں۔

مصنف کے بارے میں

راوا ڈیسک

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